Friday, December 26, 2014

जिसने की शरम उसके फूटे करम

कांग्रेस के बेहद करीबी लोग जानते हैं कि मनमोहन सरकार की लगाम माँ सोनिया ने राहुल गाँधी को ही सौंप रखी थी. 2009 में मनमोहन जब दुबारा प्रधानमंत्री बने तो राहुल गाँधी पहले से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके थे. 2010 जाते जाते माँ सोनिया अपने एकलौते बेटे को दिल्ली की गद्दी पर बैठाना चाहती थी लेकिन बेटा घोड़े पर बैठने को तैयार ही नही था. बारात चढ़ती भी तो कैसे चढ़ती .
सत्ता की शक्ति जंगल के शेर की तरह है. या तो शेर पर सवार हो जाईये या फिर उससे दूर हो जाईये. या तो सत्ता की शक्ति का प्रयोग करिए या इस प्रचंड शक्ति को त्याग दीजिये. राहुल गाँधी इस प्रचंड शक्ति के साथ साथ तो चले लेकिन पांच साल तक ये तय नही कर पाये कि शक्ति का प्रयोग करना है या उसे त्याग देना है. राहुल की इस किंकर्तव्यविमूढ़ता को देश के एक बड़े वर्ग ने नालायाकी माना. उन्हें पप्पू साबित किया. उन्हें राजनीति में नॉन-सीरियस नेता बताया. इसी कन्फ्यूज़न में राहुल जनाधार खोते चले गये. और आज जनता की भीड़ में राहुल अकेले हैं..
लेकिन सच ये भी कि देश के 5000 साल के इतिहास में राहुल उस दुर्लभ प्रजाति में गिने जायेंगे जिन्होंने राजपाठ को ठुकराया है. जिन्होंने घर के सेवक को देश का प्रधान सेवक बनवा दिया. जो राजा होकर भी पप्पू बना रहा . लेकिन एक बात मित्रों आपको माननी पड़ेगी. इस पप्पू पर अब तक पाप का ग्रहण नही लगा है . जिस देश में सिपाही को नौकरी हथेली गरम करके मिलती हो, जिस देश में विधायक और मंत्री घटिया दर्जे की चापलूसी के सहारे बनते हों, जिस देश में प्रधानमंत्री का उमीदवार बनने के लिए पार्टी टूट के कगार पर पहुँच जाती हो ...उस देश में राहुल जैसा नालायक सिर्फ एक ही है.
इसलिए वक़्त आ गया है कि राहुल अब पार्टी से खुद कहें की मुझे अध्यक्ष बनना है. उन्हें खुद को श्रेष्ठ घोषित करना होगा . अपने "मन की बात" पब्लिक से खुद कहनी होगी . नकली लालकिले पर चढ़ कर खुद बोलना होगा. आई एम द बेस्ट . भले ही उनपर जितने इलज़ाम हो तोहमतें हो . पर खुद अपने को प्रोजेक्ट करना है. उन्हें देश भर में अपनी मार्केटिंग करनी होगी. हर बैनर, पोस्टर, पम्पलेट पर सिर्फ और सिर्फ अपनी तस्वीर लगानी होगी. खुद का कद 100 साल की पार्टी से बढ़ा करना होगा. पप्पू भाई सत्यमेव जयते नही ..स्वार्थमय जयते पर चलो . अगर मोदी से नही तो केजरीवाल से ही कुछ सीख लो .
ये बाज़ार का दौर है. ये बिकने दिखने के फार्मूले पर चलता हे. भाई राजनीति अब रामराज नही रही जहाँ एक धोबी के कहने पर बुरा मान जाया करते थे. ये वक़्त बेशर्मी का है ...खुद बोलो मै बदल दूंगा भारत . मै बदल दूंगा सब कुछ ...खुद बोलो
मै करूँगा ... सिर्फ मै ही कर सकता हूँ, ..सिर्फ मे हूँ. .मै..मै और मै.
राहुल साहब आपको विरासत में देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराना मिला है. अपनी ताकत पहचानो . आपके पड़ नाना , दादी, पापा ..सब प्रधान सेवक रहे हैं ..तो फिर क्यूँ संकोच कर रहे हो यार.
याद रहे राजनीती संकोच से नही स्वार्थ से की जाती है . स्वार्थ लेकर आगे बढ़ो निसंकोच आगे बढ़ो,...अगर बेशर्मी के साथ खुद को जनता में बेच सकते हो तो बेचो वर्ना पप्पू भाई इस कीचड से दूर हो जाओ. तुम्हारी बहन ज्यादा लायक है.
तुम्हारे पास तो सिर्फ माँ है
प्रियंका के पास वाड्रा है.
वाड्रा ही अडानी की काट है.
जय भारत..

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