Thursday, July 2, 2015

हम तो चले परदेश,,,,

 राहुल गांधी को घड़ी-बेघड़ी परदेस में छुटियों का चस्का पड़ रहा है क्या? अकेले भी तैयार, परिवार निकले तब भी तैयार! सोनिया सरकार को दूर से चलाती रहीं, राहुल पार्टी के साथ शायद यही प्रयोग करने लगे हैं! कोई अच्छे आसार नहीं। जब सरकार मौके पर मौका दे रही है हमले का, पार्टी के बीच राहुल की मौजूदगी संघर्ष का हौसले और रंगत दोनों को बदल सकती थी। कार्यकर्ताओं का मनोबल रामभरोसे है। दिल्ली में प्रेस-वार्ताओं भर की कार्रवाई है; राजस्थान और मध्यप्रदेश में भूचाल उठ जाना चाहिए था, वहां कोरी बयानबाजी का सहारा है! ... शायद जैट-लेग से उबर कर कुछ जलवा दिखाएं!

Saturday, January 17, 2015

झुकती है दुनिया , झुकाने वाला चाहिए

चुनौती मुलायम और नितीश नही है ...मोदी के लिए असली चुनौती केजरीवाल है.
अराजक, नक्सल, बेख़ौफ़, बदमिजाज़.
ताल ठोंकना, कुँए में कूदना , डंके की चोट पर भिड़ना और कहीं भी किसी भी वक़्त सामने वाले के कपडे उतार देना ...ये कजरी बाबू की अदा नही कज़ा है.
जो नेता क्रोनी कैपिटलिस्ट की गोद में बैठे है वो कजरी बाबू से वैसे ही घबराते है जैसे मुंबई के लम्पट बिल्डर छोटा शकील के फ़ोन से. क्या अजीब बात है कि जिसने पूरा देश जीता हो. जिसने लाल किला हर लिया हो. जिसने धरती पुत्र ओबामा से लेकर धवल ध्वजा धारी मोहन भागवत को जता दिया हो कि मोदी का मतलब क्या है ...उसी चक्रवर्ती सम्राट को आज किरण बेदी के आगे झुकना पड़ा.
मित्रों, बड़ी किरण बेदी नही हुई. बड़ा तो आज केजरीवाल हो गया. मोदी जानते है कि अगर कजरी दिल्ली "म्युनिसिपलटी" का मुख्य मंत्री बन गया तो उसे एक संवेधानिक ताकत मिल जाएगी. वो फिर से एक काडर खड़ा कर लेगा. वो फिर से अम्बानी और अदानी पर मुक़दमे ठोकेगा. वो नाक में दम कर देगा. और कहीं केजरीवाल ने पानी बिजली सस्ता करके दिल्ली दुरुस्त कर दी तो रायसीना के पहाड़ हिलने लगेंगे .शायद इसलिए अमित शाह किरण बेदी को लेकर मोदी के घर पहुंचे. शायद इसीलिए मोदी जी को मिसेज बेदी को हाथ जोड़कर प्रणाम करना पडा.
ये पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी किसी के आगे नतमस्तक हुए हैं.
सुषमा, राजनाथ, गडकरी, जोशी और अडवानी के लिए अच्छी खबर.
सात महीने में शाख झुकने लगी. अरे भाई शाख क्या, दुनिया भी झुकती है.
झुकाने वाला चाहिए.

Source:-